रूप देकर मुझे उसमें किसी शहज़ादे का अपने बच्चों को कहानी वो सुनाती होगी |
Tag: वक्त शायरी
फ़लक़ पर जिस दिन
फ़लक़ पर जिस दिन चाँद न हो, आसमाँ पराया लगता है एक दिन जो घर में ‘माँ’ न हो, तो घर पराया लगता है।
तरीका न आये
तरीका न आये पसंद हो जाए न खता हमसे अब तुम ही बता दो वैसे ही करूँगा इश्क तुमसे अब|
मसर्रतों के खजाने
मसर्रतों के खजाने तो कम निकलते है… किसी भी सीने को खोलो तो ग़म निकलते है…
जिसको तलब हो हमारी
जिसको तलब हो हमारी , वो लगाये बोली , सौदा बुरा नहीं … बस “ हालात ” बुरे है ..!!
ना शौक बड़ा दिखने का
ना शौक बड़ा दिखने का ना तमन्ना भगवान होने की बस आरजू जन्म सफल हो कोशिश इंसान होने की
यादों में खोया रहता हूँ
तेरी यादों में खोया रहता हूँ.., लोग कहते हैं, मैं निकम्मा हूँ.., पर इसके सिवा, कर भी क्या सकता हूँ.., हर आती जाती सांसें, तेरा ही नाम लेती है|
बेताब किया है ।
जज्बो को मेरे और भी बेताब किया है । मेहँदी लगाके तुमने जो आदाब किया है |
लफ्ज ही ऐसी चीज़ है
लफ्ज ही ऐसी चीज़ है जिसकी वजह सेइंसान या तो दिल में उतर जाता है या दिल से उतर जाता है ज़िन्दगी के इस कश्मकश मे वैसे तो मैं भी काफ़ी बिजी हुँ लेकिन वक़्त का बहाना बना कर अपनों को भूल जाना मुझे आज भी नहीं आता ! जहाँ दोस्त याद न आए वो… Continue reading लफ्ज ही ऐसी चीज़ है
इतनी भी संजीदगी
इतनी भी संजीदगी अच्छी नहीं बात वो दिल में दबा कर रह गए मैंने उनके तिल की जब तारीफ़ की बस उसी पे तिलमिला कर रह गए|