जख्म कैसे दिखाऊं

जख्म कैसे दिखाऊं ये तुमको…. सबने मिल के मुझे सताया है…

दर्द दे तो गया है

दर्द दे तो गया है आशकी का….हर तरफ आंसुओं का साया है…

किस तमन्ना से

किस तमन्ना से तुझे चाहा था… किस मोहब्बत से हार मानी है…

तेरे कूचे में

तेरे कूचे में उम्र भर ना गए…सारी दुनिया की ख़ाक छानी है…

ये जो भी आज

ये जो भी आज हाल है… सब तेरी ही मेहरबानी है…

अब में क्यों तुझे

अब में क्यों तुझे प्यार करता हूँ… जब तेरे शहर से गुज़रता हूँ…

तू मुझे छोड़ के

तू मुझे छोड़ के चली भी गयी…खैर किस्मत मेरी नसीब मेरे…

वो घडी आई…

आखिर कार वो घडी आई… बार-ऐ-बार हो गए रक़ीब मेरे…

कुछ तेरी अज़मतो का

कुछ तेरी अज़मतो का डर भी था…कुछ अजीब थे ख़यालात मेरे…

हाल ऐ दिल भी

हाल ऐ दिल भी न कह सके तुझसे…तू रही मुद्दतो करीब मेरे…

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