लफ़्ज़ों के इत्तेफाक़ में

लफ़्ज़ों के इत्तेफाक़ में,यूँ बदलाव करके देख, तू देख कर न मुस्कुरा,बस मुस्कुरा के देख।।

जहा कोशिशों की

जहा कोशिशों की ऊँचाई अधिक होती है…. वहा किस्मत को भी झुकना पड़ता है ।

वो इस अंदाज़ की

वो इस अंदाज़ की मुझसे मोहब्बत चाहता है… मेरे हर ख़्वाब पर अपनी हकुमत चाहता है… !!!

सादा सा एक वादा है

सादा सा एक वादा है उन आँखों का … बंद हों तब भी तुम्हें देखेंगे.. !!!!!!!!!!

न कोई है

न कोई है छोटा न कोई बड़ा है ! अहंकार चट्टान बन कर खड़ा है !! पहाड़ा पढ़ाता है सबको ये ज़ालिम ! समय हांथ धो करके पीछे पड़ा है !!

वो जो चेहरे पे

वो जो चेहरे पे लिखी दास्तान ना पढ़ पाया,फ़ायदा नहीं कुछ उसको हाल-ए-दिल सुनाने का|

बड़े सपनो की

बड़े सपनो की चर्चा कभी छोटी सोच वालो से मत करो !!!

किस के लिए

किस के लिए जन्नत बनाई तूने ए खुदा . कौन है इस जहाँ में जो गुनाहगार नहीं…

मत कर हिसाब

मत कर हिसाब तूं मेरी मोहब्बत का, नहीं तो ब्याज में ही तेरी जिन्दगी गुजर जायेगी

ग़मज़दा साँसों की

ग़मज़दा साँसों की ख़ुदख़ुशी देखो…!!!इन्हें तू चाहिए ज़िंदा रहने के लिए…!!!

Exit mobile version