वो कहते रहे झूठ, मै करता रहा यकीन। इतना यकीन किया, यकीन नही होता।
Category: वक्त-शायरी
मैं जलता हूँ उन बातों से
मैं जलता हूँ उन बातों से भी, वो बातें.. जो मैं खुद भी नही जानता।
हर रात उधेड़ देती हैं
हर रात उधेड़ देती हैं उन शामो को, जो उन दिनों मेरी सुबह लेके आई थी।
हमने कब कहा कीमत समझो
हमने कब कहा कीमत समझो तुम मेरी… , हमें बिकना ही होता तो यूँ तन्हा ना होते…. …… ……….
मेरी गली से गुजरा.. घर तक
मेरी गली से गुजरा.. घर तक नहीं आया, , , , अच्छा वक्त भी करीबी रिश्तेदार निकला… …… ………..
सबका दिल पिघल सकता है
सबका दिल पिघल सकता है, सिवाय वक्त और तक़दीर के…………
कर्मो से ही पहचान होती है इंसानों की
कर्मो से ही पहचान होती है इंसानों की.. अच्छे कपड़े तो बेजान पुतलो को भी पहनाये जाते है
जहाँ दुसरो को समझाना कठिन हो..
जहाँ दुसरो को समझाना कठिन हो.. तो वहाँ खुद को समझा लेना चाहिए…
नाज है हमें अपने प्यार पर
नाज है हमें अपने प्यार पर , ना वो बेवफा और ना मै बेवफा, बस माँ बाप के फर्ज ने हमें जुदा करदिया..!!
तेरी चाहतों को सलाम
मेरी आदतों में शुमार, हैं एक तेरा नाम भी… यादों से बेरुखी भी, तेरी चाहतों को सलाम भी….!