मुझे इस बात का ग़म नहीं की तुमबेवफा निकले,अफसोस तो इस बात का हैं कि लोग सच निकले…
Category: वक्त-शायरी
हर लम्हे में शामिल है
मेरी मसरूफियत के हर लम्हे में शामिल है उसकी यादेँ…सोचो मेरी फुरसतों का आलम क्या होगा..
मुझे इस बात का
मुझे इस बात का ग़म नहीं की तुमबेवफा निकले,अफसोस तो इस बात का हैं कि लोग सच निकले…
कुछ तो शराफत सीख ले
कुछ तो शराफत सीख ले ऐ ‘मोहब्बत’ शराब से, बोतल पे कम से कम लिखा तो है कि मैं जानलेवा हूँ..
रहे दो दो फ़रिश्ते साथ
रहे दो दो फ़रिश्ते साथ अब इंसाफ़ क्या होगा किसी ने कुछ लिखा होगा किसी ने कुछ लिखा होगा
तमाम रिश्तों को
तमाम रिश्तों को मैं घर पे छोड़ आया हूँ, उस के बाद मुझे कोई अजनबी नहीं मिला|
कोशिश करता हूँ
कोशिश करता हूँ कि अंधेरे खत्म हो लेकिन, कहीं जुगनू नही मिलता, कहीं चाँद अधूरा है।
पढ़ते क्या हो
पढ़ते क्या हो आंखों में मेरी कहानी…. मस्ती में मगन रहना तो आदत है मेरी पुरानी…
सोचता हूं जिन्दा हूं
सोचता हूं जिन्दा हूं, मांग लूं सब से माफी, ना जाने मारने के बाद, कोई माफ करे या न करे|
तुम्हारे जाने के बाद
तुम्हारे जाने के बाद सुकून से सो नहीं पाया कभी. मेरी करवटों में रेगिस्तान सा खालीपन पसरा रहता है जब तुम पास होते हो तो कोई शिकायत नहीं होती किसी से भी.