इन कागज़ के टुकड़ों से

इन कागज़ के टुकड़ों से नहीं छुपती हकीकत उनकी, चेहरे की चमक बयां करती है उनकी रूह की तासीर क्या है…।।

सँवारती है सदा

सँवारती है सदा जिस की चाहत मुझको मेरी दुआ है की मैं उसकी हसरतों में रहूँ…

अपनी तन्हाई मेरे नाम पे

अपनी तन्हाई मेरे नाम पे आबाद करे कौन होगा जो मुझे उस की तरह याद करे |

मशरूफ रहने का

मशरूफ रहने का अंदाज़ तुम्हें तनहा ना कर दे ग़ालिब, रिश्ते फुर्सत के नहीं तवज्जो के मोहताज़ होते हैं…।

तुम नही समझोगे

तुम नही समझोगे हाल ए दिल मेरा…. ये रो रहा है लबों को हँसाने की कोशिश में!!

कुछ उनकी मजबूरियाँ..

कुछ उनकी मजबूरियाँ.. कुछ मेरी कश्मकश.. . . बस यूँ ही एक ख़ूबसूरत कहानी को.. खत्म कर दिया हमने…

सितारे भी जाग रहे हो

सितारे भी जाग रहे हो रात भी सोई ना हो….. ऐ चाँद मुझे वहाँ ले चल…. जहाँ उसके सिवा कोई ना हो….

बाहें फैलाने के बाद

बाहें फैलाने के बाद ख्याल आया, इंतेजार इंतेजार होता है…

साथ रह सकते हैं

साथ रह सकते हैं, मगर एक हो नहीं सकते… कितने मजबूर है हम किनारों की तरह…

हम आह भी करते हैं

हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम , वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नही होता …!!!

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