चाहते हो अगर

चाहते हो अगर हमेशा के लिए किसी को अपना बनाना.. तो कितना चाहते हो उसे ,ये उसे कभी ना बताना |

तस्वीर अधूरी थी

प्यार गया तो कैसे मिलते रंग से रंग और ख़्वाब से ख़्वाब एक मुकम्मल घर के अंदर हर तस्वीर अधूरी थी..

कौन कहता है

कौन कहता है मुसाफिर जख्मी नहीँ होते… रास्ते गवाह हैँ, कमबख्त गवाही नहीँ देते…

कौन-सी बात कहाँ

कौन-सी बात कहाँ, कैसे कही जाती है ये सलीक़ा हो तो हर बात सुनी जाती है जैसा चाहा था तुझे, देख न पाए दुनिया दिल में बस एक ये हसरत ही रही जाती है एक बिगड़ी हुई औलाद भला क्या जाने कैसे माँ-बाप के होंठों से हँसी जाती है कर्ज़ का बोझ उठाए हुए चलने… Continue reading कौन-सी बात कहाँ

तारीफ़ के मोहताज

तारीफ़ के मोहताज नही होते हैं सच्चे लोग, ऐ दोस्त…!! असली फूलो पर कभी इत्र छिड़का नहीं जाता…!!

कोई अखबार बेचने वाला

मुँह अँधेरे कोई अखबार बेचने वाला, हजार लाशें मेरे घर डाल जाता है|

वो जिसका तीर

वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है, वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता हैl किसी से भूल कर भी अपने दिल की बात मत कहना, यहाँ ख़त भी जरा-सी देर में अखबार होता हैl

ना खुशी की तलाश है

ना खुशी की तलाश है ना गम-ए-निजात की आरज़ू, मै ख़ुद से ही नाराज हूँ तेरी नाराजगी के बाद।

करें किसका यक़ीन

करें किसका यक़ीन यहाँ सब अदाकार ही तो हैं, गिला भी करें तो किससे करें सब अपने यार ही तो हैं।

रोज़ एक ज़ख़्म

रोज़ एक ज़ख़्म माँगता है इश्क, मेरी गठरी में इतना माल कहाँ|

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