गरूर तो मुझमे भी था कही ज्यादा।। मगर सब टुट गया तेरे रूठने के बाद।।
ज्यादा कुछ नहीं बदला
ज्यादा कुछ नहीं बदला उसके और मेरे बीच में..!! पहले नफरत नहीं थी अब मोहब्बत नहीं हैं..!!!
सोनेरी संध्या…
सोनेरी संध्या.. उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो खर्च करने से पहले कमाया करो ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे बारिशों में पतंगें उड़ाया करो दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर नीम की पत्तियों को चबाया करो शाम के बाद जब तुम सहर देख लो कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो अपने सीने… Continue reading सोनेरी संध्या…
प्यार करता हूँ !
प्यार करता हूँ इसलिए “फिकर” करता हूँ, नफरत करूँगा तो “जिकर” भी नहीं करूँगा,
शायरी क्या है मुझे पता नहीं …
शायरी क्या है मुझे पता नहीं, मै नग्मों की बंदिश जानता नहीं, मै जो भी लिखता हूँ, मान लेना सब बकवास है, जो कुछ भी हैं ये कैद इन अल्फाजों में, बस ये मेरे कुछ दर्द और मेरे कुछ ज़ज्बात हैं.
ये मत पूछो कि तुम मेरे क्या लगते हो…
ये मत पूछो कि तुम मेरे क्या लगते हो… दिल के लिए धङकन जरूरी है,और मेरे लिए तुम…
गरूर तो मुझमे भी था!
गरूर तो मुझमे भी था कही ज्यादा।। मगर सब टुट गया तेरे रूठने के बाद।।
सुना है !
सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं सुना है रब्त है उसको ख़राब हालों से सो अपने आप को बरबाद करके देखते हैं सुना है दर्द की गाहक है चश्म-ए-नाज़ उसकी सो हम भी उसकी गली से गुज़र कर देखते हैं सुना है… Continue reading सुना है !
बाहर बारिश की टिप-टिप…
बाहर बारिश की टिप-टिप… और अंदर दिल की धक-धक… अजीब सा सुर बन रहा है… मोहब्बत का मोहब्बत से…
Dil main rakhtay
Hota agar yeh mumkin tumhain … Saans bana kar dil main rakhtay.