बड़ा अरमान था

बड़ा अरमान था तेरे साथ जीवन बिताने का;
शिकवा है बस तेरे खामोश रह जाने का;
दीवानगी इससे बढ़कर और क्या होगी?
आज भी इंतज़ार है तेरे आने का!

न मेरा एक होगा

न मेरा एक होगा,
न तेरा लाख होगा,
न तारिफ तेरी होगी,
न मजाक मेरा होगा.
गुरुर न कर “शाह-ए-शरीर” का,
मेरा भी खाक होगा,
तेरा भी खाक होगा !!!