किस्मत बुरी या मैं बुरा, ये फैसला ना हो सका;
मैं हर किसी का हो गया, कोई मेरा ना हो सका!
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
किस्मत बुरी या मैं बुरा, ये फैसला ना हो सका;
मैं हर किसी का हो गया, कोई मेरा ना हो सका!
तुम्हारा जिक्र हूआ तो महफिल तक छोड़ आए हम गैरो के लबों पर हमें तो तुम्हारा नाम तक अच्छा नही लगता !!
शीशे में डूब कर पीते रहे
उस जाम को कोशिशें की बहुत मगर भुला न पाए
एक नाम को…
मैं अक्सर रात में यूं ही सङक पर निकल आता हूँ यह सोचकर..
कि कहीं चांद को तन्हाई का अहसास न हो …
दिखावे की मोहब्बत से बेहतर है दिल से नफरत
किजिये हमसे…
हम सच्चे जज्बातो की बडी कदर करते हैं
जिसे शिद्दत से चाहो,
वो मुद्दत से मिलता है ..।
बस मुद्दत से ही नहीं मिला कोई
शिद्दत से चाहने वाला
तेरी हसरत,मुझे आज फिर छत पर ले आई है..
मांग लूंगा तुझे, किसी टूटते हुए सितारे से..
ना तबीबों की तलब है न दुआ मांगी
है नी मैं जां हु बस तेरे दामन की हवा मांगी है ए दुश्मनो उठाओ हाथ मांगो जिन्दगी मेरी।
क्यों की दोस्तों ने मेरे मरने की दुआ मांगी है
ए खुदा माना हर इन्सान कि ज़िन्दगी कि
किताब आपने लिखी है।
पर कुछ पन्नो पर तो ये लिख देते
“As U Wish”
Adayen Unki, Karti Hain Preshan Mujh Ko…
Nazren
Jhuka Kar Muskurana, Jan Leta Hai..!!