सोच रहा हूँ कि लिखूं कुछ ऐसा आज जिसे पढ़,
वो रोये भी ना और, रात भर सोये भी ना..
Category: वक्त-शायरी
कैसे भूलेगी वो
कैसे भूलेगी वो मेरी बरसों की चाहत को,
दरिया अगर सूख भी जाये तो रेत से नमी नहीं जाती…
अब ना करूँगा
अब ना करूँगा अपने दर्द को बया किसी के सामने,
दर्द जब मुझको ही सहना है तो तमाशा क्यूँ करना…!!!
लोग आज कल मुझसे
लोग आज कल मुझसे मेरी खुशी का राज पूछते है, .
अगर तेरी इजाजत हो तो तेरा नाम बता दूँ !!
तू मुझे गुनहगार
तू मुझे गुनहगार साबित करने की ज़हमत ना उठा,
बस ये बता,
क्या-क्या कुबूल करना है…!!
बिन बात के ही
बिन बात के ही रूठने की आदत है,
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है. . .
आप खुश रहें, मेरा क्या है,
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है. . .
वो जब अपने हाथों की
वो जब अपने हाथों की लकीरों में मेरा नाम ढूँढ कर थक गये
सर झुकाकर बोले, लकीरें झूठ बोलती है तुम सिर्फ़ मेरे हों……….
इस दिल में
इस दिल में और कांटे चुभने से पहले,
ज़रा एक बार देख लो, कितना कांटे पहले ही
चुभा चुकी है ये दुनिया, तेरा ये काँटा कही आखरी न हो…..
लिख देना एक
लिख देना एक इबादत मेरी क्रब पर यारों,
मौत अच्छी है मोहोब्बत से तो !!
उसे कहना बिछडने से
उसे कहना बिछडने से, मोहब्बत तो नहीं मरती