परिंदों को तो

परिंदों को तो खैर रोज कहीं से, गिरे हुए दाने जुटाने हैं
पर वो क्यों परेशान हैं, जिनके भरे हुए तहखाने हैं|

अक्सर ज़माना छोङ देता है

मुसीबत में तो साथ अक्सर ज़माना छोङ देता है,
जो अपना है वो पहले आना जाना छोङ देता है।
हमारी दास्ताने जिन्दगी इक बार जो सुन ले,
तो फिर वो जिन्दगी भर मुस्कराना छोङ देता है।

जीत लेते हैं

जीत लेते हैं सैकड़ो लोगों का दिल शायरी करके..!
लोगों को क्या पता अंदर से कितने अकेले हैं हम !!

हमें पता है …

हमें पता है …तुम… कहीं और के मुसाफिर हो ..

हमारा शहर तो.. बस यूँ ही… रास्ते में आया था..!!

मैं कौन था

मैं कौन था पहले कोई पहचानता न था..,
तुम क्या मिले,ज़माने में मशहूर हो गया ।