वो कहते रहे झूठ,
मै करता
रहा यकीन।
इतना यकीन किया,
यकीन नही होता।
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
वो कहते रहे झूठ,
मै करता
रहा यकीन।
इतना यकीन किया,
यकीन नही होता।
मैं जलता हूँ उन बातों से
भी,
वो बातें..
जो मैं खुद भी नही जानता।
हर रात उधेड़ देती हैं उन शामो को,
जो उन दिनों
मेरी सुबह लेके आई थी।
हमने कब कहा कीमत समझो तुम मेरी…
,
हमें बिकना ही होता तो यूँ तन्हा ना होते….
……
……….
मेरी गली से गुजरा.. घर तक नहीं आया,
,
,
,
अच्छा वक्त भी करीबी रिश्तेदार निकला…
……
………..
सबका दिल पिघल सकता है, सिवाय वक्त और तक़दीर के…………
कर्मो से ही पहचान होती है इंसानों की..
अच्छे कपड़े तो बेजान पुतलो को भी पहनाये जाते है
जहाँ दुसरो को समझाना कठिन हो..
तो वहाँ खुद को समझा लेना चाहिए…
मेरी आदतों में शुमार, हैं एक तेरा नाम भी…
यादों से बेरुखी भी, तेरी चाहतों को सलाम भी….!