बहुत दूर है

बहुत दूर है तुम्हारे घर से
हमारे घर का किनारा……!
पर हम हवा के
हर झोंके से पूछ लेते हैं
क्या हाल है तुम्हारा….!!

उसी का शहर

उसी का शहर,
वही खुदा और वहीं के गवाह…
मुझे यकीन था,
कुसूर मेरा ही निकलेगा |