कभी मिल सको तो बेवजाह मिलना….,
वजह से मिलने वाले तो ना जाने हर रोज़ कितने मिलते है…!
Tag: जिंदगी शायरी
आ कहीं मिलते हे
आ कहीं मिलते हे हम ताकि बहारें आ ज़ाए,
इससे पहले कि ताल्लुक़ में दरारें आ जाए…
बहुत बरसों तक
बहुत बरसों तक वो कैद में रहने वाला परिंदा,
नहीं गया उड़कर जब कि सलाखें कट चुकी थी…
सज़ा ये दी है
सज़ा ये दी है कि आँखों से छीन लीं नींदें,
क़ुसूर ये था कि जीने के ख़्वाब देखे थे…
हर एक इसी उम्मीद मे
हर एक इसी उम्मीद मे चल रहा है जी रहा है,
कुछ को उसुलो ने रोक रखा है कुछ को कुसूरो ने…
तुमको देखा तो
तुमको देखा तो मौहब्बत भी समझ आई,
वरना इस शब्द की तारीफ ही सुना करते थे..!!
मेरी महोब्बत के
मेरी महोब्बत के अपने ही उसुल है…
तुम करो न करो पर मुझे साँसो के टुटने तक रहेगी|
इस दुनिया में
इस दुनिया में अजनबी बने रहना ही ठीक है..लोग बहुत तकलीफे देते है “अक्सर अपना बना कर” ।
हम भी कैसे दिवाने निकले….
हम भी कैसे दिवाने निकले…..
ए ज़िंदगी हम तुम्हें मनाने निकले….
मुमकिन हुआ तो
मुमकिन हुआ तो तुम्हे माफ करूँगा मैं…
फिलहाल तो तेरे आंसुओ का मुन्तज़िर हूँ…