कोई तालिम नहीं सीखी हमने, इस दुनियां से..।
हम आज भी सच बोलते हैं, मासूम बच्चों की तरह..।।
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
कोई तालिम नहीं सीखी हमने, इस दुनियां से..।
हम आज भी सच बोलते हैं, मासूम बच्चों की तरह..।।
लफ़्ज़ों की प्यास किसे है…
मुझे तो तेरी खामोंशियों से भी इश्क है|
वक़्त का फेर
वक़्त है ढल चुका
और ढल चुका वो दौर भी….
फ़िर भी आइने में, वक़्त पुराना ढूंढते हैं !!
महफिलें सजती थीं जहाँ
दोस्तों के कहकहों से….
दीवारों-दर पे, उनके निशान ढूंढते हैं !!
कुछ दर्द वक़्त ने
तो कुछ हैं अपनों ने दिए….
अकेले आज भी, दिल के टूकड़ों को जोड़ते हैं !!
अगर इतनी नफरत है मूझसे..,,तो कोई ऐसी दुआ कर की.तेरी दुआ भी पुरी हो जाए..,और मेरी जिंदगी भी ।
गीली आँखों का दर्द कुछ ख़फ़ा सा है…
ये जो सीने में धड़कता है बेवफ़ा सा है…
हर अल्फाज दिल का दर्द है मेरा पढ़ लिया करो,
कोन जाने कोन सी शायरी आखरी हो जाये|
आँधियाँ हसरत से अपना सर पटकती रह गईं,
बच गए वो पेड़ जिनमें हुनर झुकने का था…
रात के बाद सहर होगी मगर किस के लिए
हम ही शायद न रहें रात के ढलते ढलते |
सितारे सा टूट कर गिरूँगा कहीं एक दिन,
पर तेरी सारी ख्वाहिशें पूरी करके जाऊँगा !!
किसी और का हाथ कैसे थाम लूँ,
वो तन्हा मिल गया कभी तो क्या जवाब दूँगा…!!