रूप देकर मुझे उसमें किसी शहज़ादे का
अपने बच्चों को कहानी वो सुनाती होगी |
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
रूप देकर मुझे उसमें किसी शहज़ादे का
अपने बच्चों को कहानी वो सुनाती होगी |
फ़लक़ पर जिस दिन चाँद न हो, आसमाँ पराया लगता है
एक दिन जो घर में ‘माँ’ न हो, तो घर पराया लगता है।
तरीका न आये पसंद हो जाए न खता हमसे अब
तुम ही बता दो वैसे ही करूँगा इश्क तुमसे अब|
मसर्रतों के खजाने तो कम निकलते है…
किसी भी सीने को खोलो तो ग़म निकलते है…
जिसको तलब हो हमारी , वो लगाये बोली ,
सौदा बुरा नहीं … बस “ हालात ” बुरे है ..!!
तेरी यादों में खोया रहता हूँ..,
लोग कहते हैं, मैं निकम्मा हूँ..,
पर इसके सिवा, कर भी क्या सकता हूँ..,
हर आती जाती सांसें, तेरा ही नाम लेती है|
जज्बो को मेरे और भी बेताब किया है ।
मेहँदी लगाके तुमने जो आदाब किया है |
लफ्ज ही ऐसी चीज़ है
जिसकी वजह सेइंसान
या तो दिल में उतर जाता
है या दिल से उतर जाता है
ज़िन्दगी के इस कश्मकश
मे वैसे तो मैं भी काफ़ी बिजी हुँ
लेकिन वक़्त का बहाना बना
कर अपनों को भूल जाना मुझे
आज भी नहीं आता !
जहाँ दोस्त याद न आए वो
तन्हाई किस काम की
बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई
किस काम की बेशक अपनी
मंज़िल तक जाना है
पर जहाँ से अपना दोस्त ना
दिखे वो ऊंचाई किस काम की …….
इतनी भी संजीदगी अच्छी नहीं
बात वो दिल में दबा कर रह गए
मैंने उनके तिल की जब तारीफ़ की
बस उसी पे तिलमिला कर रह गए|
आँखों मे ख्वाब उतरने नही देता,
वो शख्स मुझे चैन से मरने नही देता…
बिछड़े तो अजब प्यार जताता है खतों मे,
मिल जाए तो फिर हद से गुजरने नही देता… !!!