जाते वक़्त उसने

जाते वक़्त उसने बड़े गुरूर से कहा था, तुझ जैसे लखो मिलेंगे, मैने मुश्कुराके के पूछा, मुझ जैसे की तलाश ही क्यू|

लोग कहते है

लोग कहते है दिल पत्थर है मेरा; इसलिए इसे पिघलना नही आता! अब क्या कहूँ क्या आता है, क्या नही आता; बस मुझे मौसम की तरह, बदलना नही आता!

रास्ता सुझाई देता है

रास्ता सुझाई देता है, न मंजिल दिखाई देती है, न लफ्ज़ जुबां पर आते हैं, न धड़कन सुनाई देती है, एक अजीब सी कैफियत ने आन घेरा है मुझे, की हर सूरत में, तेरी सूरत दिखाई देती है…

फलक की भी

फलक की भी जिद है जहाँ बिजली गिराने की , हमारी भी जिद है वहीं आशियां बनाने की . . . ! !

अब कहां दुआओं में

अब कहां दुआओं में वो बरक्कतें,…वो नसीहतें …वो हिदायतें, अब तो बस जरूरतों का जलूस हैं …मतलबों के सलाम हैं

ये दुनिया अक्सर उन्हें

ये दुनिया अक्सर उन्हें सस्ते में लूट लेती है, खुद की क़ीमत का जिन्हें अंदाजा नहीं होता !!

गुनहगारों की आँखों में

गुनहगारों की आँखों में झूठे ग़ुरूर होते हैं, यहाँ शर्मिन्दा तो सिर्फ़ बेक़सूर होते हैं..!

चेहरे पर जो

चेहरे पर जो अपने दोहरी नकाब रखता हैं, खुदा उसकी चलाकियों का हिसाब रखता हैं|

जलो वहाँ जहाँ जरूरत हो …

जलो वहाँ जहाँ जरूरत हो उजालों में चिरागों के कोई मायने नहीं होते।

पास आकर सभी

पास आकर सभी दूर चले जाते हैं, हम अकेले थे अकेले ही रह जाते हैं, दिल का दर्द किससे दिखाए, मरहम लगाने वाले ही ज़ख़्म दे जाते हैं…

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