सफ़र जितने भी थे

सफ़र जितने भी थे सब यादगार रहे …!! कमी रही तो सिर्फ हमसफ़र की …!!

रोते हुए दिल की

रोते हुए दिल की कहानी मत पूछो, कभी इश्क़ करना किरदार बन जाओगे।

लोग कहते है

लोग कहते है दुआ क़ुबूल होने का भी वक़्त होता है, हैरान हूँ मैं किस वक़्त मैंने तुझे नही

ज़िन्दगी में तन्हा हुँ

ज़िन्दगी में तन्हा हुँ तो क्या हुआ, जनाजे में सारा शहर होगा देख लेना…

काश की कहीं इश्क़ के

काश की कहीं इश्क़ के भी पकोड़े होते हम भी शिद्दत की चटनी के चटोरे होते|

यूँ ही वो दे रहा है

यूँ ही वो दे रहा है क़त्ल कि धमकियाँ, हम कौन सा ज़िंदा हैं जो मर जाएंगे…

कभी तो मेरी ख़ामोशी का

कभी तो मेरी ख़ामोशी का मतलब खुद समझ लो….! कब तक वजह पूछोगे अंजानो की

जिंदगी अब नहीं संवरेगी

जिंदगी अब नहीं संवरेगी शायद..तजुर्बेकार था.. उजाड़ने वाला…

पेड़ भूडा ही सही

पेड़ भूडा ही सही घर मे लगा रहने दो, फल ना सही छाँव तो देगा

एक पहचानें कदमों की

एक पहचानें कदमों की आहट फिर से लौट रही है, उलझन में हूँ जिंदगी मुस्कराती हुई क्यूँ रूबरू हो रही है…