तकाज़ा मौत का

तकाज़ा मौत का है और मैं हूँ।
बुजुर्गों की दुआ है और मैं हूँ॥
उधर दुनिया है और दुनिया के बंदे।
इधर मेरा खुदा है और मैं हूँ॥

कुछ ऐसी भी

कुछ ऐसी भी गुज़री हैं तेरे हिज्र में रातें
दिल दर्द से ख़ाली हो मगर नींद न आए