तकाज़ा मौत का है और मैं हूँ।
बुजुर्गों की दुआ है और मैं हूँ॥
उधर दुनिया है और दुनिया के बंदे।
इधर मेरा खुदा है और मैं हूँ॥
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क्यूँ न कुछ इस तरह
क्यूँ न
कुछ इस तरह ये ज़िंदगी हो जाए
मैं हर्फ़ हो जाऊँ
और तू लफ्ज़ बनकर मुझमें उतर जाए !
शब्द ही एसी चीज है
बोले गए शब्द ही एसी चीज है जिसकी वजह से इंसान,
या तो दिल में उतर जाता है या दिल से उतर जाता है !!
हाथ गर खाली हो
हाथ गर खाली हो, तो ये ध्यान रखना …
घर जो लौटो, तो होठों पर मुस्कान रखना ..
बच्चों के छोटे हाथों को
बच्चों के छोटे हाथों को चाँद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएँगे|
रात भर भटका है
रात भर भटका है मन मोहब्बत के पुराने पते पे ।
चाँद कब सूरज में बदल गया पता नहीं चला ।।
मरने अगर न पाई
मरने अगर न पाई तो ज़िन्दा भी कब रही ..
तन्हा कटी वो उम्र जो थी तेरे साथ की …
कुछ ऐसी भी
कुछ ऐसी भी गुज़री हैं तेरे हिज्र में रातें
दिल दर्द से ख़ाली हो मगर नींद न आए
हर रात कुछ खवाब
हर रात कुछ खवाब अधूरे रह जाते हैं…
किसी तकिये के नीचे दबकर अगली रात के लिये….
एक अरसे से
एक अरसे से मुयासिर ही नहीं है वो लफ्ज़ ,
जिसे लोग करार कहते हैं …!!