मुझे सिर्फ वक्त गुजारने के लिए ना चाहा कर..ए जिंदगी
मैं भी इन्सान हूँ और मुझे भी तकलीफ होती है|
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लाख समझाया उसको
लाख समझाया उसको की दुनिया शक करती है….
मगर उसकी आदत नहीं गयी मुस्कुरा कर गुजरने की.
मुझको ही अपने
मुझको ही अपने पास लौटना पड़ा
तुम मेरे इंतजार से आगे बढ़ गए|
हुस्न और इश्क
हुस्न और इश्क बहुत रोये गले मिल मिल कर…!!
जाने क्या कह दिया दीवाने ने दीवाने से….
हमारे इश्क़ को
हमारे इश्क़ को झूठा कैसे कहा तुमने ,
जब तुमने हमे तुमसे इश्क़ करने से पहले ही ठुकरा दिया…!!
मेरी इन चढ़ी आँखों को
मेरी इन चढ़ी आँखों को ज़रा नम कर दे,
ऐ मर्ज़ इस तकलीफ को ज़रा कम कर दे…!!
हम तो बदनाम हुए
हम तो बदनाम हुए कुछ इस कदर की पानी भी पियें तो लोग शराब कहते हैं.
कुछ लौग ये सोचकर
कुछ लौग ये सोचकर भी मेरा हाल नहीं पुँछते…
कि यै पागल दिवाना फिर कोई शैर न सुना देँ !!
जिस शहर में
जिस शहर में तुम्हे मकान कम और शमशान ज्यादा मिले…
समझ लेना वहा किसी ने हम से आँख मिलाने की गलती की थी….!!
मैंने पूछा एक पल में
मैंने पूछा एक पल में जान कैसे निकलती है, उसने चलते चलते मेरा हाथ छोड़ दिया..