परेशान तो हम भी बहुत हैं लेकिन मुस्कुरा के जीने में क्या जाता है!
Tag: शर्म शायरी
कितना लुफ्त ले रहे है
कितना लुफ्त ले रहे है लोग मेरे इश्क का,
बेवफा देख तूने तो मेरा तमाशा बना दिया|
अपने किरदार को
अपने किरदार को मौसम से बचाकर रखना लौट के फुलो में वापिस नही आती खुशबू|
न मैं शायर हूँ
न मैं शायर हूँ, न मेरा शायरी से कोई वास्ता.., बस एक शौक बन गया है, तेरी यादों को बयां करना..!!
याद रखते हैं हम
याद रखते हैं हम आज भी उन्हें पहले की तरह
कौन कहता है फासले मोहब्बत की याद मिटा देते हैं।
ना किया करो
ना किया करो कभी किसी से दिल दुखाने वाली बात…
सुना है दिल पे निशाँ रह जाते हैं सदियो तक..
किसी की मजबूरी
किसी की मजबूरी का मजाक ना बनाओ यारों…
ज़िन्दगी कभी मौका देती है तो कभी धोखा भी देती है…
यादें बनकर जो
यादें बनकर जो तुम साथ रहते हो मेरे…
तेरे इतने अहसान का भी सौ बार शुक्रिया…
वक्त इशारा देता रहा
वक्त इशारा देता रहा और हम इत्तेफाक़ समझते रहे,
बस यूँ ही धोखे ख़ाते गए और इस्तेमाल होते रहे !!
हम समंदर हैं
हम समंदर हैं, हमें खामोश ही रहने दो
ज़रा मचल गये तो शहर ले डूबेंगे…