थे तो बहुत मेरे भी इस दुनियां में कहने को अपने,
पर जब से हुआ है इश्क हम लावारिस हो गए !!
Tag: जिंदगी शायरी
जा रही हूँ
जा रही हूँ मैं तेरी जिन्दगी से कभी ना फिर लौट के आने को ,
रोक लो अपने एहसासों को जो लिपट रहे मेरे कदमों से संग आने को !
न जाने इन आंखों को
न जाने इन आंखों को किसकी जुस्तजू है
सारी रात देखता रहा घर के दहलीज को !
हर इक चेहरा
सहमा सहमा हर इक चेहरा,
मंज़र मंज़र खून में तर..
शहर से जंगल ही अच्छा है,
चल चिड़िया तू अपने घर.!
ले चल कही दूर
ले चल कही दूर मुझे तेरे सिवा जहाँ कोई ना हो.. बाँहो मे सुला लेना मुझको फिर कोई सवेरा ना हो.
शायरी भी एक मीठा जुल्म है
शायरी भी एक मीठा जुल्म है
करते रहो या ..या फिर …पढ़ते रहो….!!
नजाकत तो देखिये
नजाकत तो देखिये, की सूखे पत्ते ने डाली से कहा,
चुपके से अलग करना वरना लोगो का रिश्तों से भरोसा उठ जायेगा !!
कभी इश्क़ करो
कभी इश्क़ करो और फिर देखो इस आग में जलते रहने से..
कभी दिल पर आँच नहीं आती कभी रंग ख़राब नहीं होता…
उन्होंने ये सोचकर
उन्होंने ये सोचकर अलविदा कह दिया कि
गरीब है, मोहब्बत के अलावा क्या देगा
हुस्न वाले जब
हुस्न वाले जब तोड़ते हैं दिल किसी का,
बड़ी सादगी से कहते है मजबूर थे हम.