मतलब निकल जाने पर पलट के देखा भी नहीं,
रिश्ता उनकी नज़र में कल का अखबार हो गया !!
Tag: वक्त शायरी
आँखों की बात है..
आँखों की बात है..
आँखों को ही कहने दो…
कुछ लफ़्ज़ …लबों पर ..
मैले हो जाते हैं!
पूछ रही है
पूछ रही है आज मेरी शायरियाँ मुझसे कि,
कहा उड़ गये वो परिंदे जो वाह वाह किया करते थे ?
कितने तोहफे देती है
कितने तोहफे देती है ये मोहब्बत भी यार,
दुःख अलग रुस्वाई अलग, जुदाई अलग तन्हाई अलग…
तेरा हुस्न बयां करना
तेरा हुस्न बयां करना मकसद नहीँ था मेरा,
ज़िद कागजों ने की थी और कलम चल पड़ी.
फिर से टूटेगा
फिर से टूटेगा दिल यह बेचारा ,
फिर से वही बेवफा और मैं हूँ …
किसी सूरत से
किसी सूरत से मेरा नाम तेरे साथ जुड़ जाये
इजाज़त हो तो रख लूँ मैं तख़ल्लुस ‘जानेजां ‘अपना
मुड़ के देखा तो
मुड़ के देखा तो है इस बार भी जाते जाते
प्यार वो और जियादा तो जताने से रहा
दाद मिल जाये ग़ज़ल पर तो ग़नीमत समझो
आशना अब कोई सीने तो लगाने से रहा|
आपके कदमों से
आपके कदमों से एक ठोकर क्या लगी,
‘ख़ाक’ भी उड़ के आसमां पे गयी…
हसरतों को फिर से
हसरतों को फिर से आ जावे न होश,
दिल हमारी मानिये रहिये ख़मोश…