किसे खोज रहे तुम इस गुमनाम सी रुह में.
वो लफ़्जो में जीने वाला अब खामोशी में रहता है|
Tag: प्यारी शायरी
उसे छत पर
उसे छत पर खड़े देखा था मैं ने
कि जिस के घर का दरवाज़ा नहीं है|
आज फिर शाख़ से
आज फिर शाख़ से गिरे पत्ते
और मिट्टी में मिल गए पत्ते|
न शाख़ ने थामा
न शाख़ ने थामा, न हवाओं ने बक्शा,
वो पत्ता आवारा ना फिरता तो क्या करता।
ना जाने कितनी
ना जाने कितनी अनकही बातें,
कितनी हसरतें साथ ले जाएगें..
लोग झूठ कहते हैं कि खाली हाथ आए थे
और खाली हाथ जाएगें|
रोज एक नई तकलीफ
रोज एक नई तकलीफ रोज एक नया गम,
ना जाने कब ऐलान होगा की मर गए हम
ये ज़िंदगी भी
ये ज़िंदगी भी कोई ज़िंदगी है हम-नफ़सो
सितारा बन के जले बुझ गए शरर की तरह…
जीत लेते हैं
जीत लेते हैं सैकड़ो लोगों का दिल शायरी करके..!
लोगों को क्या पता अंदर से कितने अकेले हैं हम !!
तुझसे किसने कहा
तुझसे किसने कहा कि यह मुमकिन है?
कि मैं रहूँ और मुझ में तू ना रहे?
ज़िन्दगी वक़्त के साथ
ज़िन्दगी वक़्त के
साथ बदलती चली
जा रही है,
बचपन की शामें लंबी
हुआ करती थी
अब की शाम
दावे पाँव अँधेरे
के साथ आकर
निकल जाती है..