एक तेरे बगैर ना गुजरेगी मेरी ज़िन्दगी …
बता मैं क्या करू सारे ज़माने की मोहब्बत ले के
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
एक तेरे बगैर ना गुजरेगी मेरी ज़िन्दगी …
बता मैं क्या करू सारे ज़माने की मोहब्बत ले के
कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा
मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है
पागलपन की हद से न गुजरे तो प्यार कैसा. .?
होश मे तो रिश्ते निभाए जाते है
बहुत कुछ होता है…कहने को… सुनने को…
जब मिलता है किसी मोड़ पे प्यार पुराना अपना…
निकाल तो लाया हूं पिन्जरे से इक परिन्दा ,
मगर बाकी है अभी परिन्दे के दिल से पिन्जरा निकालना.
मुखौटे बचपन में देखे थे, मेले में टंगे हुए,
समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे चढ़े हुए…!!
ग़ज़ल में इश्क़ की बूंदे ?
दूर रखो तेज़ाब सी लगती है ।
काश़ पढ़ लेता कोई मुझ अधूरे को
आधी लिखावट में दर्द पूरे को…!
तुम तो शरारत पे उतर आए, ये कैसी चाहत पे उतर आए…….,
दिल क्या दिया तुम्हें अपना, तुम तो हुकूमत पे उतर आए…..
कैसे इस दिल से तुझे भुला दें हम
तेरे नाम की लय पर तो धड़कनें चलती हैं..!!