तुम्हारा साथ भी छूटा , तुम अजनबी भी हुए
मगर ज़माना तुम्हें अब भी मुझ में ढूंढता है !!
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
तुम्हारा साथ भी छूटा , तुम अजनबी भी हुए
मगर ज़माना तुम्हें अब भी मुझ में ढूंढता है !!
तकिये के लिहाफ में छुपाकर रखी हैं तेरी यादें,
जब भी तेरी याद आती है मुँह छुपा लेता हूँ|
उम्र भर ख़्वाबों की मंज़िल का सफ़र जारी रहा,
ज़िंदगी भर तजरबों के ज़ख़्म काम आते रहे…
हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर,तुझपर
ज़रा भी ज़ोर होता मेरा,
ना रोते हम यूँ तेरे लिये, अगर हमारी
ज़िन्दगी में तेरे सिवा कोई ओर होता !
अजीब तरह से
गुजर रही हैं जिंदगी…!!!
सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ..!!!
इश्क़ का रंग और भी गुलनार हो जाता है….
जब दो शायरों को एक दुसरे से प्यार हो जाता है|
शाख़ पर रह कर कहाँ मुमकिन था मेरा ये सफ़र,
अब हवा ने अपने हाथों में सँभाला है मुझे…
सभी के अपने मसाइल सभी की अपनी अना,
पुकारूँ किस को जो दे साथ उम्र भर मेरा…
मैं तेरी कोई नहीं मगर इतना तो बता ,
ज़िक्र से मेरे, तेरे दिल में आता क्या है ..!!
तुम न जाने किस किस को अच्छे लगते हो,
मेरे लिए तो तुम बस मुझे अपने लगते हो !!