मैं पूछता रहा
और फ़िर..
इस तरह
मिली वो मुझे सालों के बाद ।
जैसे हक़ीक़त मिली हो ख़यालों के बाद ।।
मैं पूछता रहा उस
से ख़तायें अपनी ।
वो बहुत रोई मेरे सवालों के बाद ।।
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
मैं पूछता रहा
और फ़िर..
इस तरह
मिली वो मुझे सालों के बाद ।
जैसे हक़ीक़त मिली हो ख़यालों के बाद ।।
मैं पूछता रहा उस
से ख़तायें अपनी ।
वो बहुत रोई मेरे सवालों के बाद ।।
मैं अपनी चाहतों का
हिस्सा
जो लेने बैठ जाऊं,
तो सिर्फ मेरा याद करना
भी ना लौटा सकोगे ।
कभी बेवजह भी कुछ ना कुछ खरीद लिया करो दोस्तों.. ये वो खुद्दार लोग है जो भिख नही मांगते
हम इश्क के मारो का इतना सा फसाना है
संग रोने को कोई नही हमपे हसने को जमाना है
अमीरी भी
क्या चीज़ है
कुत्ते, बिल्ली, तोता खुद पालते है
और खुद के बच्चे आया पालती है
कितने कमज़ोर है यह गुब्बारे, चंद सासों में फूल जाते है,
बस ज़रा सी बुलंदिया पाकर, अपनी औकात भूल जाते है…
जख्मों को अपने अब ढक कर चलता हूँ…
आजकल लोगों के लहजों में ही नमक झलकता है…!!
मिट जाते है वो
औरों को मिटाने वाले
.
लाश कहा रोती है?
रोते हैं जलाने वाले
हसरतें मचल गयी जब तुमको सोचा एक पल के लिए;
सोचो दीवानगी तब क्या होगी,जब तुम मिलोगे मुझे उम्र भर के लिए…..
कुछ पाने की बेचैनियाँ भी होनी चाहियें दिल में
वरना जीने का क्या फायदा…