हमने काँटों को भी नरमी से छुआ है..
लोग बेदर्द हैं जो फूलो को भी मसल देते हैं..
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
हमने काँटों को भी नरमी से छुआ है..
लोग बेदर्द हैं जो फूलो को भी मसल देते हैं..
इतनी बिखर जाती है तुम्हारे नाम की खुशबु मेरे लफ़्जों मे..!
की लोग पुछने लगते है “इतनी महकती क्युँ है शायरी तुम्हारी..??
देखे हैं बहुत हम ने हंगामे मोहब्बत के
आग़ाज़ भी रुस्वाई …..अंजाम भी रुस्वाई….
आशिकी से मिलेगा ऐ जाहिद,
बंदगी से खुदा नहीं मिलता।
हमारे बाद अंधेरा रहेगा महफ़िल में
बहुत चराग़ जलाओगे रौशनी के लिए
तुमको दे दी है इशारों में इजाज़त मैंने….
मांगने से ना मिलूं तो चुरा लो मुझको….
मुझे शायद सूरत देखकर ही प्यार करना था
दिल देख के प्यार करने का नतीजा भुगत लिया मैने !!
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी….
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए…
खामोशियाँ ही बेहतर हैँ जिन्दगी के सफर मेँ…..
शब्दों की मार नेँ कई घर तबाह किये हैँ…..
सोचता हूँ गिरा दूँ सभी रिश्तों के खंडहर ,
इन मकानो से किराया भी नहीं आता है ….!!