उम्दा सारी आदतें

उम्दा सारी आदतें, फूटे हुए नसीब। कच्चे धागे से हुई, माला बेतरतीब।।

बिछड़कर फिर मिलेंगे

बिछड़कर फिर मिलेंगे यकीन कितना था… बेशक ख्वाब ही था मगर.. हसीन कितना था…

मोहब्बत से फतैह

मोहब्बत से फतैह करो लोगो के दिलो को, जरुरी तो नही सिकन्दर की तरह तलवार रखी जाये…

अकेले आये थे

अकेले आये थे और अकेले ही जाना है, फिर ये अकेला रहा क्यूँ नहीं जाता..

तुम आ गए हो

तुम आ गए हो तो अब आइना भी देखेंगे… अभी अभी तो निगाहों में रौशनी हुई है…!!!

हम अपने उसूलों से

हम अपने उसूलों से, डगमगाये तो थे ज़रूर; पर आप भी मुस्करा कर, पलटे तो थे हुज़ूर!

देखा है क़यामत को

देखा है क़यामत को,मैंने जमीं पे नज़रें भी हैं हमीं पे,परदा भी हमीं से|

जब भी मिलते हो

जब भी मिलते हो , रूठ जाते हो , यानी रिश्तों में , जान बाक़ी है |

वो एक ख़त

वो एक ख़त जो तूने कभी मुझे लिखा ही नहीं…? देख मै हर रोज़ बैठ कर उसका जवाब लिखता हूँ….

हम भी मुस्कराते थे

हम भी मुस्कराते थे कभी बेपरवाह अंदाज से , देखा है आज खुद को कुछ पुरानी तस्वीरों में..!!

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