शायद कुछ दिन

शायद कुछ दिन और लगेंगे, ज़ख़्मे-दिल के भरने में,
जो अक्सर याद आते थे वो कभी-कभी याद आते हैं।

ये न पूछ

ये न पूछ के शिकायतें कितनी है तुझसे
ये बता के तेरा और कोई सितम बाकी तो नहीं …!!!

लाजमी नही है

लाजमी नही है की हर किसी को मौत ही छूकर निकले “”

किसी किसी को छूकर जिंदगी भी निकल जाती है ||