अभी तो साथ चलना है
समंदरों की लहरों मॆं…
किनारे पर ही देखेंगे…
किनारा कौन करता है?
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
अभी तो साथ चलना है
समंदरों की लहरों मॆं…
किनारे पर ही देखेंगे…
किनारा कौन करता है?
कुछ भी नहीं है बाक़ी बाज़ार चल रहा है,
ये कारोबार-ए-दुनिया बेकार चल रहा है|
बहुत ही खूबसूरत होती है एक तरफ़ा मोहब्बत
ना ही कोई शिकायत होती है और
ना ही कोई बेवफ़ा कहलाता है|
सोच रहा हूँ कि लिखूं कुछ ऐसा आज जिसे पढ़,
वो रोये भी ना और, रात भर सोये भी ना..
कैसे भूलेगी वो मेरी बरसों की चाहत को,
दरिया अगर सूख भी जाये तो रेत से नमी नहीं जाती…
लोग आज कल मुझसे मेरी खुशी का राज पूछते है, .
अगर तेरी इजाजत हो तो तेरा नाम बता दूँ !!
तू मुझे गुनहगार साबित करने की ज़हमत ना उठा,
बस ये बता,
क्या-क्या कुबूल करना है…!!
रिश्ते की गहराई अल्फाजो से मत नापो..
सिर्फ एक सवाल सारे धागे तोड़ जाता है…!
रिश्ता दिल का होना चाहिए
जनाब
ख़ून के रिश्ते हमने वृद्धाश्रम में देखे हैं|
क्यों एक दुआ में अटक के रह गया है दिल,
क्यों तेरे सिवा कुछ और माँगा नही जाता|