मुझे भी शुमार करो

मुझे भी शुमार करो अब गुनहगारों की फेहरिस्त में,

मैं भी क़ातिल हूँ हसरतों का, मैंने भी ख्वाहिशों को मारा है…।

ना रास्ता हैं

ना रास्ता हैं ना मंजिल है बस चला जा रहा हूँ !!

हिम्मतें तो बहुत हैं बस हाथ की लकीरों से मात खा रहा हूँ !!

मैं एक हाथ से

मैं एक हाथ से सारी दुनिया के साथ लड़ सकता हूँ ,
बस मेरा दुसरा हाथ तेरे हाथ में होना चाहिए !!

उसकी गली का

उसकी गली का सफर आज भी याद है मुझे…

मैं कोई वैज्ञानिक नहीं था पर मेरी खोज लाजवाब थी…

दुनिया वाले गली-गली में

दुनिया वाले गली-गली में दीवार बनाते हैं
मुहब्बत का सर काट दे वो तलवार बनाते हैं

ये अदा है दुश्मनी की जो हर आशिक को
अपनी ही मौत का तलबगार बनाते हैं|

ये लफ़्ज़ों की

ये लफ़्ज़ों की शरारत है, ज़रा संभाल कर लिखना तुम;
मोहब्बत लफ्ज़ है लेकिन ये अक्सर हो भी जाती है।