मुझे भी शुमार करो अब गुनहगारों की फेहरिस्त में,
मैं भी क़ातिल हूँ हसरतों का, मैंने भी ख्वाहिशों को मारा है…।
Dil ke jazbaati lafzon ki ek mehfil ! | दिल के जज्बाती लफ्जो की एक महफ़िल !
मुझे भी शुमार करो अब गुनहगारों की फेहरिस्त में,
मैं भी क़ातिल हूँ हसरतों का, मैंने भी ख्वाहिशों को मारा है…।
अब किसी और के वास्ते ही सही,
तेरे मुस्कुराने के अंदाज़ वैसे ही हैं…
ना रास्ता हैं ना मंजिल है बस चला जा रहा हूँ !!
हिम्मतें तो बहुत हैं बस हाथ की लकीरों से मात खा रहा हूँ !!
मैं एक हाथ से सारी दुनिया के साथ लड़ सकता हूँ ,
बस मेरा दुसरा हाथ तेरे हाथ में होना चाहिए !!
उसकी गली का सफर आज भी याद है मुझे…
मैं कोई वैज्ञानिक नहीं था पर मेरी खोज लाजवाब थी…
बिछड़कर फिर मिलेंगे यकीन कितना था,
बेशक ख्वाब ही था मगर हसीन कितना था…
दुनिया वाले गली-गली में दीवार बनाते हैं
मुहब्बत का सर काट दे वो तलवार बनाते हैं
ये अदा है दुश्मनी की जो हर आशिक को
अपनी ही मौत का तलबगार बनाते हैं|
पसन्द नहीं तुम्हारी ये बात,
जब बिन बात के ही बात नहीं करते..!!
ये लफ़्ज़ों की शरारत है, ज़रा संभाल कर लिखना तुम;
मोहब्बत लफ्ज़ है लेकिन ये अक्सर हो भी जाती है।
तेरे चले जाने से, मुझे ग़ज़लो का हुनर आया,
लिखा पहले भी बहुत,पर असर अब आया..!!