मैं वक़्त बन जाऊ, तू बन जाना कोई लम्हा,
मैं तुझमे गुज़र जाऊं, तू मुझमें गुज़र जाना…
Category: दर्द शायरी
लौटा देती ज़िन्दगी
लौटा देती ज़िन्दगी एक दिन नाराज़ होकर ,,,,
काश मेरा बचपन भी कोई अवार्ड होता।
नादानी भी सच मे
आज कल…की नादानी भी सच मे बेमिसाल हे..
अंधेरा दिल?मे है और लोग दिये मन्दिरों मे जलाते हैं…
सच्चाई बस मेरी
सच्चाई बस मेरी खामोशी में है….
शब्द तो में लोगो के अनुसार बदल लेता हु….
अंदाज कुछ अलग
अंदाज कुछ अलग है,
मेरे सोचने का….
सब को मंजिल का शौक है
और मुझे रास्तो का…
तुम मेरा नाम
शर्म, दहशत, झिझक, परेशानी, नाज़ से काम क्यूँ नही लेती…
…
आप, वो, जी, मगर…ये सब क्या है, तुम मेरा नाम क्यूँ नही लेतीं ।
उसकी जुस्तुजू उसका
उसकी जुस्तुजू उसका इंतज़ार और अकेलापन,
.
थक कर मुस्कुरा देता हु जब रोया नहीं जाता
लहज़े में बदज़ुबानी
लहज़े में बदज़ुबानी,
चेहरे पे नक़ाब लिए फिरते है,
जिनके खुद के बहीखाते बिगड़े है
वो मेरा हिसाब लिए फिरते है…।।
जिन्दगी में एक बार
जिन्दगी में एक बार वो
मेरी हो जाती
कसम खुदा की,
दुनिया की हर किताब से नाम बेवफाई
का मिटा देता..!!
बहुत देता है
बहुत देता है तू उसकी
गवाहियाँ और उसकी सफाईया
समझ नहीं आता तू मेरा दिल है या उसका वकील !!!